शुक्रवार, 27 मार्च 2009

मौत का विज्ञान




दो दोस्त स्वर्ग में मिले,एक दूसरे को देख थोड़ा हिले|
पहले ने कहा तू यहाँ कैसे ?दूसरा बोला तू जैसे,मैं भी वैसे|

पहला बोला:यार मेरी मृत्यु का कारण बना विज्ञान(साइंस)
और उसी की वजह से चले गए अपने प्राण|
क्या बताऊँ,केमिस्ट्री का प्रैक्टिकल चल रहा था,
और अपना मन मचल रहा था|
सोचा के क्यूँ न किया जाए कुछ कमाल,
और जैसे ही बाकर में रखे केमिकल में असिड डाला तो हो गया धमाल|
ऐसा अँधेरा छाया की उसके बाद अपने को दीरेक्ट स्वर्ग में पाया....

अब तू बता तुझे था क्या हुआ क्योंकि तेरा मुंह भी है कुछ लटका हुआ

दूसरा बोला:अपना भी था तेरे जैसा ही हाल इलेक्ट्रिकल(सुबेजेक्ट) देखते ही बिगड़ जाती थी अपनी ताल|
एक दिन मन में थान गया एकाएक
के आज electrical और मुझमे रहेगा केवल एक|
मन था कुछ कर गुजरने का ,
और वो भी प्रक्टिक्ली करने का|
जाने मन क्यूँ बावरा हो गया,
और तैश में आकर कूलर ठीक करने लग गया|

तभी लगा ऐसा करंट,
टूट गया वर्षों का घमंड|
अन्दर से आई माँ की आवाज़ ,
"क्या हुआ बेटा नूरा?"
मुंह से केवल इतना निकला-"माँ सर्किट हो गया पूरा"|

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