आजकल चैनलों में मंदी का असर देखा जा सकता हैरोज़ खबरें आती हैं कि आज अमुक चैनल में छटनी हुई आज फलां में से लोगों को निकाला गया दरअसल मंदी कुछ है,और कुछ बताई एवं दिखाई जाती है मंदी के अचूक ब्रह्मास्त्र से चैनलों के एच -आर विभाग ने कई ऐसे लोगों को भी बाहर का रास्ता दिखला दिया जो किसी न किसी की आँख की किरकिरी बने हुए थे पत्रकार एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसके पास समय का काफी अभाव होता हैवह दूसरी कंपनियों के कर्मचारियों से इस बात में भिन्न होता है कि उसका समय १० से ५ बजे तक नौकरी का नहीं होतापत्रकारों ने हमेशा से अपने ऊपर कॉरपोरेट जगत के क़ायदे-कानून लादे जाने का विरोध किया हैपत्रकारों ने कभी एच-आर के क़ायदे-कानूनों का पालन गर्मजोशी से नहीं कियाउन्होंने गुटखा खाकर उसकी पीक डस्टबिन में ही थूकी,चाय पीकर कप टेबल पर ही रखा और अगर सिगरेट पीने की इच्छा हुई तो या तो वहीं बैठे कश लगा लिया या न्यूजरूम से बाहर निकल औपचारिकता निभाते हुए टेंशन को धुएं में उड़ा दियाये सब बातें अपनी जगह हैं परन्तु इस तरह के लोगों ने अपने काम में कभी कोई कमी नहीं आने दीवे पूरी तरह अपने काम में लीन और समर्पित रहेइस तरह के लोग जो कायदों को ठेंगा दिखाते हों ,एच-आर उन्हें फायदे में कैसे रहने देते?आखिर "क़ायदे में ही फ़ायदा होता है"मंदी के नाम पर ऐसे लोगों को एच-आर विभाग ने ठिकाने लगा दियादरअसल एच-आर कर्मचारी खुद को सबसे उच्च कोटी का व्यक्ति समझता है वह सोचता है कि चैनल में सब काम तरीके से हों ,लोग हंसी-ठट्टा न करें ,चाय टेबल पर न पियें,हमेशा अपना आई -कार्ड रुपी पत्ता गले में डाले रहेंबात करते वक़्त प्रार्थना वाला लहज़ा हो ये सब बाकी कंपनियों में तो संभव है परन्तु चैनलों में नहींपत्रकारों के मध्य ये सब कोई मतलब नहीं रखते कई एच-आर बेहद कम जानकारी रखते हैं एवं साक्षात्कार के दौरान ऐसे पेश आते हैं मानो १००-१०० कोस तक इनके जैसा कोई नहीं हैमैंने जब इंटर्नशिप के लिए एक नामी चैनल में साक्षात्कार दिया तो चैनल की एच-आर हेड एक महिला थीं उन्होंने ऊलजुलूल प्रश्नों का जो सिलसिला शुरू किया तो मेरी स्थिति "काटो तो खून नहीं" वाली हो गयीउनका प्रशन था"आपने इतनी पढ़ाई क्यों की?"
मेरा उत्तर था-ज्यादा पढ़ना कोई बुरी बात तो नहीं ,अगर व्यक्ति अपनी शिक्षा में,शैक्षणिक योग्यता में वृद्धि करता रहे तो कोई बुरी बात है क्या?वैसे भी मुझे पढ़ाई का शौक़ हैदूसरा प्रश्न -आप अपनी एम.ए अलगप्पा विश्वविद्यालय से कर रहे हैं परन्तु ये तो कोई विश्वविद्यालय है ही नहींमेरा उत्तर-महोदया,अगर आप कहतीं कि मैंने इस विश्वविद्यालय का नाम नहीं सुना है तो बात कुछ और होती किन्तु आपने यह कह दिया है की इस नाम का कोई विश्वविद्यालय है ही नहींआपकी जानकारी के लिए बता दूं कि यह विश्वविद्यालय १९८५ में तमिलनाडु विधानसभा के एक्ट से बना विश्वविद्यालय है जो NAAC द्वारा "A" ग्रेड में आँका गया हैयह विश्वविद्यालय AIU का सदस्य है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्यताप्राप्त हैयह दूर शिक्षा परिषद् से भी मानित है जहाँ तक दूरस्थ शिक्षण प्रणाली का सवाल है एक एच-आर हेड कि ऐसी जानकारी होना मुझे बहुत अजीब लगावो महिला इतने ऊंचे पद पर आसीन है वो भी एक न्यूज़ चैनल के ,फिर भी ऐसी जानकारी?ये वाकई उस चैनल का दुर्भाग्य ही कहा जाएगाकई एच-आर पत्रकारों के ऑफिस आने का टाइम भी नोट करते हैं,अब इनको कौन समझाए कि पत्रकारों के कार्यालय आने-जाने का कोई समय नहीं होताये ख़बर को फालो करते हैं और शिफ्ट का समय ओवर हो जाने पर भी काम करते रहते हैंएच-आर कर्मचारियों को ये समझना चाहिए की जिस दबाव में पत्रकार काम करता है वह है क्याकभी उनके जाने का समय भी नोट किया कीजियेएक महिला न्यज़ चैनल में नयी नयी एच-आर बनीं थीं तो आते ही उन्होंने डंडा चलाना शुरू कर दियायहाँ टेबल पर कप क्यों रखा है,आई-कार्ड गले में क्यूँ नहीं डाला हुआ है,गुटखा काम करते वक़्त क्यूँ खाते हो इत्यादि-इत्यादिसारे पत्रकार परेशान एक दिन उस महिला कि बहस सीनियर प्रोड्यूसर से हो गयी,देखते ही देखते मामले गर्म हो गया और बात इस्तीफे तक आ गयीअब वो प्रोड्यूसर कोई छोटी मोती हस्ती तो थे नहींउन्होंने अपना इस्तीफा मेल से भेज दियाजब उच्च प्रबंधन तक बात पहुंची तो उस एच-आर हेड कि क्लास ली गयी और किसी तरह प्रोड्यूसर साहब को मनाया गयाऐसे एक नहीं अनेक मामले देखने को मिलते हैंकई भाई लोग तो पान -गुटखा खाए बगैर काम नहीं कर सकते कईयों को ३-४ बार चाय पीने कि आदत हैअगर गुटखा न खाएं या सिगरेट के कश न लगायें तो क्या मजाल कि ख़बरें लिख दी जाएं या बुलेटिन में नयी ख़बरें डाली जाएं
लेकिन एच-आर वाले लोगों को ये बातें कहाँ समझ आती हैं?वह तो मंदी कि आड़ में ऐसे लोगों को निकाल रहे हैं जिनसे उनकी व्यक्तिगत दुश्मनी है या जो पहले से ही चाटुकारिता के आदर्श से परे कई लोगों कि आँख कि किरकिरी बने हुए हैं
मंगलवार, 22 सितंबर 2009
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चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. सतत लेखन के लिए शुभकामनाएं. जारी रहें.
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Till 30-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!
अनमोल भाव के साथ मन खिल उठा। चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. सतत लेखन के लिए शुभकामनाएं. मेरे ब्लोग पर आपका इंतजार है।
जवाब देंहटाएंaap sabka dhanyawad
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