चाय का महत्व
चाय का भारत में काफी महत्व है|शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो चाय न पीता हो,और अगर पीता न हो तो उसे चाय के बारे में न पता हो|चाय का इतना महत्व शायद ही किसी दूसरे देश में हो|अगर सुबह उठते ही चाय न मिले तो क्या मजाल की बिस्तर छूट जाए|इसे "बेड टी "की संज्ञा दी जाती है|यहाँ आपको यह बताते चलें कि भारत विश्व का सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन करने वाला देश है,यह बात और है कि चाय ही काफी महंगी है यहाँ पर|अब तो आलम यह है कि आम आदमी के बस से बाहर होती जा रही है ये चाय|
हम चाय के महत्व के बारे में बात कर रहे थे,भारत में चाय का एक महत्वपूर्ण स्थान है|सुबह उठो तो चाय,मेहमान घर आये तो चाय|बारिश हो तो पकोड़े और चाय,प्रेशर न बन रहा हो तब चाय,नींद न आने देनी हो तो चाय|ख़ुशी का माहौल हो तो चाय और यहाँ तक कि किसी कि मौत पर गएँ हों तो भी चाय|ये चाय रिश्ते बनाने में काफी सहायक साबित होती है,चाहे वो रिश्ता प्रेमी-प्रेमिका का,प्रोफेसर-छात्र का या फिर दो दोस्तों का और या फिर दो सहकर्मियों का|चाहे चाय नुकसान करती हो परन्तु फिर भी लोगों के जीवन में इसका एक अनूठा स्थान है|चाय की ही दुकान पर लोग अपने संबंधों को मज़बूत करते एवं देश दुनिया पर चर्चा करते दिखाई देते हैं|शीला सरकार के राज में जहाँ हर चीज़ महंगी होती जा रही है वहीं चाय भी इस से अछूती नहीं है|245 ग्राम चाय की कीमत औसतन 74 रुपए के करीब है|इसके अलावा जो सामग्री इसमें डलती है वो भी महंगी हुई है,मसलन दूध जो इसकी प्रमुख सामग्री में से एक है वह पिछले 4 महीनों में 3 बार बढ़ चुका है|चीनी की कीमतों से कौन वाकिफ नहीं है|40 रु/किग्रा रेट चल रहा है आजकल|मैं तो श्रीमती शीला दीक्षित से यही अनुरोध करूँगा कि जिस चाय में इतनी खासियत है उसे तो कम से कम गरीबों से दूर न करें|उनपर कुछ तो तरस खाएं|
अरुण सरोहा
हिंदी पत्रकारिता
दिल्ली विश्वविद्यालय|

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